भंडारा की श्रीकृष्ण टाकीज की बगल वाले खाली मैदान पर एक मंच बना हुआ है ৷ आज यहाँ दुर्गा उत्सव के अंतर्गत कादर ऑर्केस्ट्रा का प्रोग्राम है ৷ श्रीकृष्ण टाकीज के सेकण्ड शो में आज भीड़ बिलकुल नहीं है ,सिनेमा कौन देखेगा ..मुफ्त में ऑर्केस्ट्रा का प्रोग्राम जो देखने मिलने वाला है ৷
ऑर्केस्ट्रा वालों की बस नागपुर से आ चुकी है, तबला,हारमोनियम,गिटार, क्लोरोनेट, कांगो और बांगो ड्रम्स,अकोर्डियन,सेक्सोफोन आदि वाद्ययंत्र स्टेज पर सज चुके हैं ৷ गाने वालों और संचालक के लिए तीन स्टैंड माइक के अलावा हर वाद्ययंत्र के सामने भी एक एक माइक लगा है ৷ अब वादक गण धीरे धीरे मंच पर पधार रहे हैं ৷ सामने दरी पर, कुर्सियों पर, दुकानों के सामने पटियों पर बैठी जनता की उत्सुकता चरम पर पहुँच चुकी है ৷ आसपास के मकानों की छतों पर माताओं बहनों का साम्राज्य है ৷
अब दाहिने हाथ में माइक लिए हुए और बाएँ हाथ में तार को समेटते हुए ऑर्केस्ट्रा का मुख्य पात्र यानी अनाउंसर उपस्थित होता है ৷ वह चकमक करती हुई ड्रेस पहने हुए है ৷ जनता की ओर देखकर वह अभिवादन करता है .. अमीन सयानी के अंदाज़ में एक आवाज़ गूंजती है.. मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, प्यारे दोस्तों, आज आपकी खिदमत में पेश है जनाब मोहम्मद कादर और उनकी पार्टी का मशहूर ऑर्केस्ट्रा ..৷
फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के शम्मीकपूर की स्टाइल में ड्रम स्टैंड पर बैठा एक ड्रमर पीतल की चकती पर जोर से स्टिक पटकता है, वातावरण में झन्न की आवाज़ सुनाई देती है, साथ ही सारे साज बज उठते हैं ৷ जनता तालियाँ बजाती है ৷
अनाउंसर महोदय फिर माइक थाम लेते हैं ..लीजिये अब आपकी खिदमत में पेश है हमारे प्रोगराम की पहली पेशकश, फिल्म का नाम है ‘मेरे सनम’, मजरूह सुल्तानपुरी का कलाम,जिसे ओपी नय्यर की मौसीकी में गाया है आशा भोंसले ने .. आपके सामने लेकर आ रही हैं कादर ओर्केस्ट्रा पार्टी की सितारा कलाकार मिस जेनेट ...गीत के बोल हैं .. ‘ये है रेशमी ज़ुल्फों का अँधेरा न घबराइए .. जहाँ तक महक है मेरे गेसुओं की चले आइये ..’
फिर एक सिलसिला शुरू हो जाता है ৷ जेनेट के बाद कादर साहब आते हैं जो मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज़ में गाने के लिए मशहूर हैं ৷ यह वह दौर था जब ‘जवानियाँ ये मस्त मस्त बिन पिए’, ‘चाहे कोई मुझे जंगली कहे’, ‘आसमान से आया फ़रिश्ता’ ‘आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा’ जैसे मस्ती भरे गीतों से लेकर, ‘दिन ढल जाए तेरी याद सताए’ , ‘अकेले हैं चले आओ’ जैसे उदासी भरे गीत भी उनकी आवाज़ में हमने सुने ৷ मिस जेनेट जो लताजी और आशाजी की आवाज़ में खूब गाती थीं बाद में कादर साहब के साथ युगल गीत गाते हुए उनसे विवाह कर श्रीमती जीनत बन गई थीं ৷
उन दिनों भंडारा में कादर ऑर्केस्ट्रा के अलावा, ओ.पी. सिंह एंड पार्टी , योगेश ठक्कर का ऑर्केस्ट्रा ,महेश कुमार एंड पार्टी और ऐसे ही कई ऑर्केस्ट्रा बहुत मशहूर थे ৷ उन दिनों राजनांदगांव से राजभारती ऑर्केस्ट्रा भी भंडारा आया करता था जिसमे एक भाटिया जी थे जो किशोर कुमार की आवाज़ में बहुत मस्ती के साथ गीत गाते थे ৷ अब तो नागपुर में ही सौ से अधिक ऑर्केस्ट्रा पार्टी या बैण्ड हो गए हैं ৷ इन पुराने ऑर्केस्ट्रा समूह में बीच बीच में वादकों को भी अपना फन दिखाने का अवसर मिलता था और वे फिल्म संगीत का कोई टुकड़ा जिसे वे म्यूजिक पीस कहते थे अवश्य सुनाते थे ৷ सेक्सोफोन वादक तो पूरा गीत ही पेश करते थे ৷ उन्नीस सौ सत्तर में आई फिल्म ‘ द ट्रेन’ का गाना गुलाबी ऑंखें जो तेरी देखीं शराबी ये दिल हो गया’ सेक्सोफोन वादकों का फेवरेट गाना रहा ৷
ऑर्केस्ट्रा में गायकों तथा वादकों के अलावा संचालक का सबसे अधिक महत्व होता था । वह गाये जाने वाले गीत का विवरण प्रस्तुत करने के अलावा बीच बीच में चुटकुले भी सुनाता था और उस दौर के प्रतिष्ठित कलाकारों जैसे देवानन्द, दिलीप कुमार, ओमप्रकाश, जीवन, राधाकिशन,के.एन.सिंग, मनोज कुमार, मेहमूद,राजेश खन्ना,संजीव कुमार,अजीत,प्राण आदि की आवाज़ की मीमिक्री भी प्रस्तुत करता था । दर्शकों को बांधे रखने की कला में माहिर संचालक को देखकर मेरे मन में भी यह इच्छा उत्पन्न होती थी कि मैं बड़ा होकर ऑर्केस्ट्रा संचालक बनूंगा । आगे जाकर मेरी यह इच्छा कुछ समय के लिये पूरी भी हुई ।
वे भी क्या दिन थे जब भंडारा के गांधी चौक, शहीद चौक,महल के सामने तिवारी ट्रांसपोर्ट के मैदान में,कॉलेज रोड पर पी डब्ल्यू डी ऑफिस के पास ,सिविल लाइन्स जैसी जगहों पर ऑर्केस्ट्रा संगीत का यह मेला लगता था ৷ नब्बे के दशक तक यह ऑर्केस्ट्रा प्रेम अपने चरम पर पहुँच चुका था फिर धीरे धीरे टेलीविज़न आता गया, दुर्गा गणेश मंडलियों के पास पैसे भी कम होते गए और आयोजक लोगों ने ऑर्केस्ट्रा बुलाना बंद कर दिया৷

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