फिर कांग्रेस की ध्वजा लहराई | महंगाई बढने के आसार | लोन अब सस्ते होंगे | सरकारी दफ्तरों में छापा । इस हफ्ते रिलीज़ फिल्म सुपर हिट । बाबा के प्रवचन में हज़ारों की भीड़ ।
अखबार में छपी इन भारी भरकम खबरों के बीच मै अगर कहूँ कि “ पाबला जी की प्यारी डॉगी डेज़ी नहीं रही “ तो आप कहेंगे यह भी कोई खबर है। संवेदनाहीन होते जा रहे इस समाज में मनुष्य की मृत्यु भी अब झकझोरने वाली खबर नहीं रही । हत्या,दुर्घटना ,दंगे के समाचार भी अब हम उचटती नजर से पढ़ते हैं और पन्ना पलट देते हैं । हमें ग्लैमर चाहिये जो हमें अपनी पसन्द के पन्नों और चैनलों मे मिल जाता है ।
कल शाम पाबला जी से इस दुखद समाचार को पाकर मै भी बहुत व्यथित हुआ फिर द्विवेदी जी से भी बात हुई उन्होने अपनी संवेदना प्रकट करते हुए ब्लॉग अनवरत पर एक पोस्ट लगाई है जहाँ आप डेज़ी के बारे में पढ़ सकते हैं । मै कवि हूँ सो मनुष्य के इस वफादार मित्र पर लिखी कवितायें तलाशता रहा । आश्चर्य ! कमला दास सुरैया ,नरेश चन्द्रकर से लेकर फैज़ अहमद फैज़ कई कवियों ने इस पर लिखा है । सोचा था सभी की कवितायें दूंगा लेकिन रात इंटरनेट की समस्या की वज़ह से पोस्ट नहीं कर पाया सो यह फिर कभी । आज श्रद्धांजली स्वरूप मनुष्य के कुत्तों को लेकर अन्धविश्वास पर 1984 में लिखी अपनी कविता “हम आदमी हैं कुत्ते नहीं” का यह प्रारम्भिक अंश ।
कुत्ता क्यों रोता है ?
और उस वक़्त आशंकाओं से त्रस्त
कोई नहीं सोया था
सब अपने हाथों में लेकर खड़े थे
अन्धविश्वास के पत्थर
कुत्ते को मारने के लिये तत्पर
किसी अज्ञात आशंका से सब भयभीत थे
डर के कारण सबके चेहरे पीत थे
किसी ने नहीं सोचा
कि कुत्ता क्यों रोता है
अरे!
उसे भी भूख लगती है
उसे भी दर्द होता है ।
शरद कोकास आईये पड़ोस को अपना विश्व बनायें: चित्र गूगल से व पाबला जी से साभार