10 जून 2026

138. भंडारा : लाल दादा और काले जादू वाली औरत


एक पुराना रिकॉर्ड प्लेयर,उस पर चढ़ा एक छोटा सा ई पी रिकॉर्ड और स्पीकर से आती ब्रिटिश गायिका पेटुला क्लार्क की आवाज़ जिसमे वे केलिफोर्निया के शहर के बारे में कुछ कह रही हैं ...

इफ़ यू आर गोइंग टू सान फ्रांसिस्को बी श्योर टू वियर फ्लावर्स इन योर हेयर 

समर टाइम विल बी अ लव इन देयर इन द स्ट्रीट्स ऑफ़ सान फ्रांसिस्को

पेटुला क्लार्क की आवाज़ से मेरा परिचय लाल दादा के माध्यम से हुआ था ৷ उन दिनों वे खरगपुर आई आई टी में पढ़ते थे और मुंबई से खरगपुर जाते हुए अपने बुआ फूफा के पास भंडारा में कुछ दिन ज़रूर ठहरते थे ৷ चार साल यह सिलसिला बराबर चलता रहा ৷ 

लाल दा अपने साथ एक रिकॉर्ड प्लेयर और कुछ रिकॉर्ड्स लेकर चलते थे ৷ उनका कहना था कि बिना संगीत के समर और विंटर वेकेशन बिताना बहुत मुश्किल है ৷ जितने दिन वे हमारे घर रुकते भंडारा की हमारी गली में पेटुला क्लार्क , अमेरिकन रॉक बैंड की कार्लोस सांताना और अन्य जिप्सी ग्रूप्स के गीत गूंजते रहते ৷ सांताना का एक गीत वे बार बार सुनते थे ...आई गॉट अ ब्लैक मैजिक वुमन शी इज़ अ ब्लैक  मैजिक वूमन ৷ सांताना का यह प्रसिद्ध रॉक सॉन्ग "ब्लैक मैजिक वूमन" जिसे मूल रूप से फ्लिटवुड मैक ने 1968 में रिकॉर्ड किया था और कार्लोस सांताना ने अपने 1970 के एल्बम Abraxas में प्रसिद्ध किया था। यह गाना एक सम्मोहक जादू का वर्णन करता है।

santana carlos 

वह नए नए शब्दों और लोगों से परिचय के दिन थे ৷ लाल दा ने बताया कि उन्नीस सौ बत्तीस में जन्मी पेटुला क्लार्क सेकंड वर्ल्ड वार के समय बी बी सी रेडियो पर चाइल्ड एंटरटेनर के रूप में सबसे पहले प्रसिद्ध  हुई थीं ৷ द लिटिल शू मेकर गीत से उन्हें उन्नीस सौ चौवन में प्रसिद्धी मिली और इंग्लिश फ्रेंच जर्मन गीत गाते हुए उन्नीस सौ चौसठ में वे अमेरिका की लोकप्रिय गायिका बन गईं ৷

If you are going to San Francisco
Be sure to wear some flowers in your hair
If you are going to San Francisco
You're gonna meet some gentle people there

यह 1960 के दशक का एक बेहद प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गीत है। हालाँकि इसे मूल रूप से स्कॉट मैकेंज़ी (Scott McKenzie) ने 1967 में गाया था, लेकिन पेटुला क्लार्क (Petula Clark) सहित कई अन्य महान कलाकारों ने भी इसके शानदार कवर गाए हैं। यह गीत अमेरिका के 'समर ऑफ लव' (Summer of Love) का प्रतीक था, जो शांति और भाईचारे का संदेश देता है। [1, 2, 3]

लाल दा की वज़ह से अंग्रेज़ी संगीत का मुझे ऐसा चस्का लगा कि उनके खरगपुर या मुंबई चले जाने के बाद मैं रेडिओ सीलोन पर ढूंढ ढूंढ कर विदेशी संगीत सुनता था ৷ बाबूजी कभी इस बात पर आश्चर्य नहीं करते थे, वे जानते थे कि यह लाल दादा की संगत  का असर है ৷ सूचनाओं के समंदर में गोता लगाते हुए लाल दा से ही मुझे पता चला कि दोस्ती के कई आयाम होते हैं और पेन फ्रैंड नाम की भी कोई चीज़ होती है ৷

लाल दादा की अमेरिका में एक पत्र मित्र थीं जिनका नाम था लुईस रोज़ ৷ लाल दा  बाबूजी से उनके बारे में बताया करते ৷ एक दिन उन्होंने एक पत्र उन्हें लिखा जिसमे भारतीय संस्कृति के विषय में उन्होंने लिखा कि हमारे यहाँ पशु बलि जैसी बातें आम हैं, यह साधुओं का देश है यहाँ लोग बहुत कम पढ़े लिखे हैं आदि आदि ৷

बाबूजी को जब उन्होंने यह बताया तो वे किंचित नाराज़ हुए ৷ उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि यह बातें सही नहीं हैं लेकिन तुम्हारे द्वारा इनका प्रस्तुतीकरण का ढंग सही नहीं है ৷ हमें सत्य ही लिखना चाहिए लेकिन उसका प्रस्तुतिकरण ऐसा हो  जिसमे झूठ भी न हो और हमारा आत्म गौरव भी बना रहे ৷ कम से कम विदेशियों के सामने तो यह बहुत आवश्यक है ৷ ज़ाहिर है लाल दा ने अपने फूफाजी की बातों को बहुत गंभीरता से लिया और उस पत्र को फाड़ कर एक नया पत्र अपनी मित्र लुईस को लिखा ৷ 

लाल दा के साथ भंडारा में बिताए बचपन के  दिनों की बहुत ख़ुशगवार यादें हैं ৷ लाल दादा जब भी  भंडारा रुकते एक न एक बार हम लोग वैनगंगा अवश्य जाते ৷ लाल दा ने हमें टॉवेल से मछली पकड़ना सिखाया ৷  पानी की बहती धार में दो लोग टॉवेल पकड़ कर खड़े हो जाते थे जैसे ही छोटी छोटी मछलियाँ उसके ऊपर आती टॉवेल उठा लेते । कुछ देर बाद उन्हे फिर पानी में छोड़ देते थे । यह क्रिया अपने बिम्ब रूप में मुझे इतनी अच्छी लगी कि  बाद में मैंने अपनी कविता में भी इसे इस्तेमाल किया ৷

एक बार लाल दादा एक मरी हुई मछली लेकर घर आ गये और उन्होंने ब्लेड से उसकी चीर फाड़ शुरू कर दी यह कहते हुए कि देखें मछली के भीतर क्या होता है । अब वह मछली थी ही इतनी सी कि उसके भीतर हमें कुछ नहीं मिला । मैं बहुत आश्चर्य के साथ डायसेक्शन की यह प्रक्रिया देखता रहा । मैंने सोचा ग़रीब और छोटे लोग भी इसी तरह होते हैं उनकी जितनी चीर फाड़ कर लो उनके भीतर सिवाय ग़रीबी के कुछ नहीं मिलता ৷

लाल दादा और मेरी उम्र में  हाफ़ पैंट और  फुलपैंट जितना अंतर था ৷ एक बार मेरी जिद पर उन्होंने मुझे अपनी फुलपैंट पहनने के लिये दी । वह पेंट काफी लम्बी थी  इसलिए  उन्होंने उसे नीचे की ओर से मोड़ दिया और बेल्ट से कस दिया । उस पैंट को पहनकर मैं उनके साथ अपने मित्र  नईम के घर गया  हालाँकि फुल पैंट पहनने का आनंद रास्ते भर खिसकती हुई पैंट को संभालने में ही ख़त्म हो गया৷ 

साल बीतते गए, लाल दा की बी टेक की डिग्री कम्प्लीट हो गई वे मुंबई लौट गए ৷ उनका भंडारा आने का यह सिलसिला भी समाप्त हो गया ৷ फिर तो कुछ ऐसा हुआ जैसा कि उपन्यासों और फिल्मों में होता है ৷ लाल दा  ने एम टेक और पी एच डी के लिए लास एंजेल्स यूनिवर्सिटी में आवेदन किया, उनका चयन हो गया और आगे की शिक्षा हेतु वे अमेरिका चले गए৷ 

इस कहानी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि लाल दा जब अमेरिका पहुँचे तो उन्हें लेने के लिए उनकी वही बचपन की पत्र मित्र लुईस रोज़ वहाँ उपस्थित थीं ৷ मन से तो वे एक दुसरे को तो जानते ही थे अब भौतिक रूप से जानने लगे ৷ प्रेम का अंकुर तो शायद काफी पहले ही उपज चुका था अब तो आगे का रास्ता तय करना शेष था ৷

उन दिनों एक बार जब लाल दा मुंबई आए तो बाबूजी ने उनसे पूछा “तुम भारत नहीं लौटोगे ? “ लाल दा ने जवाब दिया “हमें एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी में जितनी बातें भारत के पाठ्यक्रम में सिखाई गई हैं उनमे अधिकांश पद्धतियाँ अमेरिकन कृषि पद्धति के बारे में हैं, भारत में रहकर उनकी कोई उपयोगिता नहीं है ৷ एक लम्बी बहस के बाद बाबूजी की समझ में यही आया कि लाल दा और भी बहुत सारे बच्चों की तरह अब अमेरिका में ही बस जायेंगे और भारत कभी नहीं लौटेंगे ৷ ब्रेन ड्रेन शब्द भी उन्ही दिनों इंट्रोड्यूस हुआ था ৷  

आगे की कहानी बस इतनी सी है कि फिर लुईस रोज़ श्रीमती लुईस आनंद शर्मा बन गईं ৷ डॉ आनंद शर्मा यानि लाल दा अमेरिका में सेटल हो गए ৷ ৷ सफल वैवाहिक जीवन के चालीस साल उनके पूरे हो चुके हैं ৷ उनकी दो संताने हुई  और अब तो उनके भी विवाह हो गए हैं ৷ लाल दा से मुलाक़ात हुए बरसों हो गए ৷ अब भी कभी कभी जब उनके साथ बिताये दिन याद आते हैं तो गूगल पर “शी इज़ अ ब्लैक मैजिक वूमन” टाइप करके कार्लोस सांताना की आवाज़ सुनता हूँ ৷

फूलों को देखकर याद आता है वही गीत... अगर आप सान फ्रांसिस्को जा रहे हैं तो अपने बालों में ढेर सारे फूल धारण करना न भूलें ৷ जीवन में कभी अगर वहाँ जाना हुआ तो मैं भी इस बात का ध्यान रखूंगा ৷ आप भी ध्यान रखियेगा ৷

 अगर आप पेटुला क्लार्क का यह गीत सुनना चाहते हैं तो इस लिंक से सुने https://youtu.be/bsOMnhwC_Bc?si=BPXrKdNYYtkQCo18

और SANTANA का ब्लैक मैजिक वुमन सुनना चाहें तो इस लिंक से सुने https://youtu.be/9wT1s96JIb0?si=XQQDrfXX6O_adOt2

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