11 जून 2026

165. भंडारा : मेरे काका लीलाधर वसाणी , पानसे काका , हंडियेकर सर , देशपांडे काका , नान्दूरकर काका

बीच मे प्रिंसिपल वेणी उनके दाहिनी ओर देशपांडे बाईं ओर बाबूजी 

भंडारा के ऐसे अनेक लोग थे जो बाबूजी के मित्र थे उन दिनों अंकल कहने का चलन नहीं था इसलिए हम बच्चे अपने से बड़े लोगों  को काका या काकाजी कहा करते थे आज ऐसे ही काकाओं  के बारे मे बात करते हैं

देशपांडे और नान्दूरकर काका - 

बाबूजी के साथ देशपांडे काका और नान्दूरकर काका उनके कलीग थे । देशपांडे काका की दो बेटियाँ थीं और नान्दूरकर काका के एक बेटा व तीन बेटियाँ । उनका बेटा श्रीकांत यानि राजा मेरा मित्र था । हम लोग कभी कभी उनके घर जाया करते थे और वे लोग भी हमारे घर आया करते थे । जब मेरी नौकरी लगी तो देशपांडे काका ने सलाह दी  कि अपनी तनख्वाह मे से हर महीने सौ रुपये बचाया करो जिससे किताबें खरीदो और फिर सी ए आई आई बी की इग्ज़ैम की तैयारी करो यह इग्ज़ैम पास करके बहुत जल्दी ऑफिसर बन जाओगे ।  मैंने उनकी आज्ञा का पालन किया यद्यपि इग्ज़ैम तो मैं पास नहीं कर पाया लेकिन बचत करने की मेरी आदत हो गई बचत का यही पैसा आगे चलकर मेरे बहुत काम  आया । 

हंडियेकर सर – 

बाबूजी के एक मित्र और थे जिनका नाम था विठ्ठल नागेश हंडियेकर । वे इन्दौर के रहने वाले थे और भंडारा के जे एम पटेल कॉलेज में इतिहास के व्याख्याता थे । उनकी पत्नी जकातदार कन्या शाला में पढ़ाती थीं । बाबूजी ने भी इतिहास में एम ए किया था इस नाते उनकी मुलाकातें होती रहती थीं । बचपन के उन दिनों में मेरा तो उनसे अधिक सम्पर्क नहीं हुआ लेकिन मेरे कॉलेज जाने के बाद मेरे जीवन में उनका महत्वपूर्ण रोल रहा । उन्हीं के कहने पर बाबूजी ने मुझे पोस्ट ग्रेजुएशन के लिये उज्जैन भेजा था । बी ए मे मैंने इतिहास लिया था इतिहास को नक्शे की सहायता से कैसे समझ जाए यह मुझे हँड़िएकर काका ने ही बताया  हँड़िएकर काका के बच्चे नहीं थे इसलिए वे मुझे अपनी संतान की तरह ही समझते थे । 

और भी बहुत से लोग थे भंडारा में जैसे डॉ.सुधाकर जोशी और उनकी पत्नी कुछ समय बाद वे हमारे फैमिली डॉक्टर हो गए थे। हमारे आसपास रहने वालों में जिनके नाम मुझे याद आते हैं वे हैं  डॉ.हरदास, श्री तेजनाथ दलाल, श्री अशोक भिवगड़े,श्री शांडिल्य,देव मास्टर,श्री निखार, श्री खंडालकर, पी सी रहांगडाले, श्री पानसे, श्री बापट, श्री हार्डीकर,राम हेडाऊ, श्री गोविन्द असोलकर, डॉ.रामकुमार सिंह, श्री हरिमोहन कौल और श्रीमती कुसुमताई गोंडनाले जिनके बेटे किशोर से बाद में बहन सीमा का विवाह हुआ ।   


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