आज पास-पड़ोस पूरी तरह बदला हुआ दिखाई दे रहा है । रेडिओ पर सुबह से देशभक्ति के गीत बज रहे हैं । बच्चे हाथों में तिरंगा लहराते हुए अपने गणवेश में स्कूल जा रहे हैं । हर चौक पर झंडा फहराया जा रहा है । सुबह बैंक की इमारत पर झंडा फहराने के बाद अभी मैं मोहल्ले के चौक पर अपने रिक्शेवाले मित्रों से मिलकर आया हूँ और खूब सारी बून्दी खाई है ।
अधिनायक
राष्ट्रगीत में भला कौन वह
भारत भाग्य विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका
गुन हरचरना गाता है ।
मख़मल टमटम बल्लम तुरही
पगड़ी छत्र चँवर के साथ
तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर
पूरब-पच्छिम से आते हैं
नंगे-बूचे नरकंकाल
सिंहासन पर बैठा,उनके
तमगे कौन लगाता है ।
कौन-कौन है वह जन-गण-मन-
अधिनायक वह महाबली
डरा हुआ मन बेमन जिसका
बाजा रोज़ बजाता है ।
- रघुवीर सहाय
(कविता राजकमल पेपरबैक्स की " रघुवीर सहाय की प्रतिनिधि कविताएँ "से व चित्र गूगल से साभार )
आप सभी को गणतंत्र पर्व पर शुभकामनाएँ - शरद कोकास
रघुवीर सहाय जी की कविता पढ़वाने के लिये शुक्रिया, सवालों के जबाब ढ़ूँढ़ने होंगे।
जवाब देंहटाएंसही और सार्थक चिंतन करती रचना है रघुवीर सहाय जी की ......
जवाब देंहटाएंयह दुःख की बात नहीं..कि आज भी ये कविता उतनी ही प्रासंगिक है..कहीं कुछ नहीं बदला....इस कविता से रु-ब-रु करवाने का बहुत बहुत शुक्रिया
जवाब देंहटाएंप्रासंगिक रचना! आज ही एक और ब्लाग पर और पढ़ चुका हूँ,इसे।
जवाब देंहटाएंयही सच्चे लोकतन्त्र की निशानी है.
जवाब देंहटाएंसार्थक रचना लेकर आये आज आप रघुवीर सहाय जी की. आभार.
जवाब देंहटाएंगणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.
सादर
समीर लाल
आपको और आपके परिवार को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रहना पढवाई आपने कितनी सार्थक और सामयिक.
जवाब देंहटाएंगणतंत्र दिवस की शुभकामनायें.
राष्ट्रगीत या राष्ट्र गान में??????????
जवाब देंहटाएंजय हिंद...
गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाऎँ
जवाब देंहटाएंआज भी प्रासंगिक
जवाब देंहटाएंIs rachnase ru-b-rukaraneke liye dhanyawad!
जवाब देंहटाएं्रघुवीर सहाय जी की सुन्दर रचना पढवाने के लिये बधाई
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