16 सितंबर 2009

भगवत रावत सर .. मुझे तो राजकपूर जैसे लगे ..




            भोपाल में श्यामला हिल्स की सबसे ऊंची चोटी पर बसा है रीजनल कॉलेज ऑफ एजुकेशन  जहाँ मै उन दिनों बी.एस.सी.ऑनर्स का छात्र था । एक दिन कॉरीडोर से गुजरते हुए एक क्लास के भीतर नज़र पड़ी, देखा एक गोरे खूबसूरत से प्रोफेसर क्लास ले रहे हैं । अपने सहपाठी अमरीश सक्सेना से पूछा “ क्यों अमरीश ,अपने यहाँ विदेश से कोई प्रोफेसर प्रतिनियुक्ति पर आये हैं  क्या ? “ अमरीश ने कहा “ नहीं यार ,ये रावत सर हैं , हिन्दी पढ़ाते हैं ।“मैने कहा “ बिलकुल राजकपूर जैसे लगते हैं । “ कुछ दिनों बाद हमारे सीनियर लीलाधर मंडलोई ने बताया कि “ भगवत रावत हिन्दी के बहुत अच्छे कवि हैं । “
            पिछली 13 सितंबर को भगवत रावत सर सत्तर साल के हो गये । इस अवसर पर मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ ने टी टी टी आई के  सहयोग से “महत्व भगवत रावत “ कार्यक्रम का आयोजन भोपाल में किया । देश के बहुत सारे साहित्यकार इस अवसर पर एकत्रित हुए । वाराणसी से डॉ.विश्वनाथ त्रिपाठी , डॉ.ब्रजबाला सिंह , दिल्ली से लीलाधर मंडलोई ,मुम्बई से विजय कुमार , हरियाणा के डी.जी.और कवि विकास नारायण राय ,उज्जैन से कवि चन्द्रकांत देवताले ,लज्जाशंकर हर्देनिया,मनोहर वर्मा, सेवाराम त्रिपाठी भोपाल से डॉ.कमला प्रसाद ,राजेन्द्र शर्मा , कवि राजेश जोशी ,ओम भारती ,शैलेन्द्र शैली,रेखा कस्तवार ,उर्मिला शिरीष ,विजय अग्रवाल  और मेरे ढेर सारे युवा कवि मित्र कुमार अम्बुज ,हरिओम राजोरिया,रविन्द्र स्वप्निल प्रजापति, विवेक गुप्ता, बहादुर पटेल .प्रताप राव कदम,आशीष त्रिपाठी ,अंजना बक्षी ,हरि भटनागर,विनीत तिवारी,नवल शुक्ल, अरुण पाण्डे । रावत सर के परिवार के सदस्य मुकुल रावत, प्रज्ञा,अनुपमा और संवेदना रावत तो थे ही वहीं संवेदना की तीन वर्षीय बेटी धानी से लेकर देवीशरण ग्रामीण जैसे अठहत्तर वर्षीय बुजुर्ग भी थे ,दो सौ से भी अधिक लोग । 11 सितम्बर को समारोह का उद्घाटन हुआ ,12 को दो सत्र मे भगवत रावत के समग्र साहित्य पर चर्चा हुई , मुझे मिलाकर आठ लोगों ने आलेख पढ़े और उपस्थित रचनाकारों ने टिप्पणियाँ दीं । 13 को हम सब लोगों ने मिलकर रावत सर का जन्म दिन मनाया , लाल गुलाबों की ढेर सारी मालायें उन्हे पहनाई गईं ।
            पिछले माह रावत सर का फोन आया था “ आ रहे हो ना शरद ? “ उन्होने पूछा था । “ हाँ सर आ रहा हूँ , मैने आपकी कविता श्रंखला ‘सुनो हिरामन ‘ पर आलेख भी लिखा है । “मैने कहा था । “ ज़रूर आना “ सर ने कहा था “ तुम लोग आ जाओगे तो मै दो-चार साल और ज़िन्दा रह जाउंगा ।“ मुझे पता है ,भगवत रावत सर गम्भीर बीमारियों से लड़ रहे हैं लेकिन अदम्य जिजीविषा है उनके भीतर और इस उम्र में भी वे कविताएँ लिख रहे हैं ..” किंतु मृत्यु का भय मेरा भय नहीं क्योंकि वह परम सत्य है / मैं तो जग के इस विराट में अपनी दुनिया खोज रहा हूँ .. ।“ मुझे नहीं पता “दी हुई दुनिया” के कवि रावत सर की यह खोज पूरी हुई या नहीं लेकिन हम लोगों ने उनके भीतर अपनी पूरी दुनिया पा ली है।
            भगवत रावत सर की कविताओं में से कौनसी कविता दूँ ..समझ मे नहीं आ रहा  ..!! चलो यह छोटी सी कविता उनके संग्रह “ समुद्र के बारे में “( 1977) से ..
अलख सुबह
काम पर जाता हुआ बच्चा
कोहरे में डूबी सड़क
पार कर रहा है
सड़क जितनी लम्बी है
उतनी चौड़ी भी है
सड़क जितनी सूनी है
उतनी दूनी भी है
सड़क को यह सब नहीं पता
और बच्चा
उसे भी कहाँ पता कि वह
सड़क पार कर रहा है
                        - भगवत रावत
शेष कवितायें और हिरामन पर आलेख फिर कभी । आइये हम सब मिलकर हिन्दी के वरिष्ठ कवि भगवत रावत की दीर्घायु की कामना करें और यह भी कि हम सब पर उनका स्नेह बना रहे । आपका -शरद कोकास

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपने रिपोर्टे में रावत सर का शानदार रेखाचित्र खींच दिया है। सुनो हीरामन पर आप का आलेख कब पढ़ा रहे हैं?

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  2. Ye sansmaran padhna behad achha laga, paathshala se leke college tak ke din yaad aa gaye...'kahreme doobee sadak"..Somerset Maugham yaad dila diya..unohnone likha tha," khidkee ke taavdaan par hohara aise jama dikha jaise, ek billee dubak baithee ho..."

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  3. क्या बात है आप ने तो अपने सर का सर ऊंचा कर दिया.
    धन्यवाद

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  4. भगवत रावत की कविताएं, हमारे समय की महत्वपूर्ण थाती हैं।
    उनका कवि, उनके व्यक्तित्व से कहीं ज्यादा बडा़ है।

    शुक्रिया।

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  5. प्रस्तुत रचना पढ़कर आनन्द आ गया. आभार.

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  6. भागवत जी, सुंदर विचारों और भावों के धनी..
    कविता बहुत अच्छी लगी...आगे भी भागवत जी के कविताओं का इंतज़ार रहेगा..भगवान उन्हे लंबी आयु दे...
    और आप को बधाई ऐसे महान साहित्यिक पुरुष के बारे में अवगत कराया
    आपने

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  7. वाकई ऐसे ही हैं..भगवत रावतजी...मैं उनसे भोपाल में मिल चुका हूं...पिछले साल जब हिंदी साहित्य सम्मेलन की गोष्ठी थी। हमने उनके साथ उनकी बेटी प्रज्ञा रावत के घर खाना भी खाया था। ईश्वर उन्हे लंबी आयु दे।

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  8. Kahee Bhopal me rahee hoon Arera colony me 6 maheene aur regional college of Education me tab Suhas aur Vijay padhate the, 1972-73 kee bat hai. Puranee yaden taja ho gaee auraapke shikshkon ke prati prem dekh kar bahut hee achcha laga. Bhagwat Rawat Sir ko humaree bhee shubj kamnaen. sadak wali kwita sunder hai,

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  9. अलख सुबह
    काम पर जाता हुआ बच्चा
    कोहरे में डूबी सड़क
    पार कर रहा है
    सड़क जितनी लम्बी है
    उतनी चौड़ी भी है
    सड़क जितनी सूनी है
    उतनी दूनी भी है
    सड़क को यह सब नहीं पता
    और बच्चा
    उसे भी कहाँ पता कि वह
    सड़क पार कर रहा हैnicecomred
    suman loksangharsha.blogspot.com
    cpof india

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  10. शरदजी आपके कृतार्थ हैं ऐसा कह कर आपका काम हलका नहीं करुँगी पर सच में
    धन्यवाद कहने लायक बात तो धन्यवाद मांगती है

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