7 अगस्त 2009

एक छोटा बच्चा विमान से कूद गया

छह अगस्त की वह एक खुशनुमा सुबह थी कि अचानक नाश्ते की टेबल पर बैठे जापान के शहर हिरोशिमा के लोगों को सायरन की तेज़ आवाज़ सुनाई दी । दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था और लोग इन आवाज़ों के अभ्यस्त हो चुके थे । हिरोशिमा के खुले आसमान में एक विमान मंडरा रहा था जो मौसम की जानकारी इकठ्ठा करने वाला विमान था ।
कुछ देर बाद तीन विमान आसमान पर नज़र आये उनमें से एक विमान ने कुछ नीचे की ओर उड़ान भरी । इधर घड़ी ने ठीक सवा आठ बजाये और उस विमान से एक “ छोटा बच्चा “ कूद पड़ा । जी हाँ , यह छोटा बच्चा “लिटिल बॉय ” नाम का एक एटम बम था जो हिरोशिमा की धरती पर काल की तरह तेज़ी से चला आ रहा था । ठीक 43 सेकंड में 1850 फुट की दूरी पर पहुंचते ही एक ज़ोरदार धमाका हुआ और हिरोशिमा का 10 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र पल भर में गायब हो गया ।
कल्पना कीजिये उस दृश्य की.. शहर की सारी बिल्डिंगे नष्ट हो चुकी हैं ,चारों तरफ आग लगी है, तेज़ हवाएं उस आग को और भड़का रही हैं ,चारों तरफ शोर,हाहाकार.आर्तनाद, चीखें और क्षण भर में 70000 जीवन समाप्त । पशु पक्षी,पेड़-पौधे ,मकान,स्कूल.अस्पताल,सब नेस्तनाबूद ।
अभी इस विनाश को तीन दिन भी नही हुए थे और विश्व इस सदमे की भयावहता का आकलन भी नही कर पाया था कि 9 अगस्त को जापान के ही दूसरे शहर नागासाकी में सुबह11 बजे “फैट मैन” नाम के एक प्लूटोनियम बम ने इसी तरह की तबाही मचा दी जिसमें 80000 लोग मारे गये ।
यह तबाही अब तक जारी है । एटम बम के विकीरण ,जलने और बीमारियों से अब तक ढाई लाख से भी अधिक लोग काल के गाल मे समा चुके हैं ।बाद के वर्षों में न जाने कितने बच्चे विकलांग पैदा हुए कितनी माँओं की कोख उजड़ गई । हज़ारो लोगों की कब्र पर खड़ी है यह आधुनिक सभ्यता जहाँ आज “लिटिल बॉय” और “फैट मैन” से भी ज़्यादा खतरनाक बम मौजूद है जिन्हे विमान से गिराने की ज़रूरत भी नही । सिर्फ एक बटन दबाकर मिसाईलों के ज़रिये जिन्हे दागा जा सकता है । इस घटना के एक सप्ताह बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था और युद्ध थम गया था लेकिन इस तरह छह अगस्त और नौ अगस्त 1945 का नाम इतिहास के उन काले पन्नों मे हमेशा के लिये दर्ज़ हो गया जो अनगिनत मासूमों के खून से रंगे हैं ।
मै एक मामूली सा कवि हूँ इस के खिलाफ क्या कर सकता हूँ ? बस आप जैसे प्रबुद्ध लोगों से एक अपील कर सकता हूँ और कवियों, लेखको को आव्हान कर सकता हूँ, सो अपनी इस कविता के माध्यम से कर रहा हूँ ।

युद्ध के खिलाफ

कवि उठो लिखो कविता युद्ध के खिलाफ
युद्ध में प्रयुक्त प्रक्षेपास्त्रों के खिलाफ
प्रक्षेपास्त्र चलाने वाले हाथों के खिलाफ
हाथों को संचालित करने वाले दिमागों के खिलाफ

लिखो कि अभी वसुन्धरा पर
हम साँस लेना चाहते हैं खुली हवा में
लिखो कि अभी आकाश में हम
देखना चाहते हैं चमकता हुआ सूरज
लिखो कि अभी जिये नहीं हैं हमने
जिन्दगी के आने वाले अच्छे दिन
लिखो कि अभी जीवन के प्रति
बहुत सारे उत्तरदायित्व शेष हैं

हवस के घोड़ों पर सवार
तानाशाहों के लिये यह चेतावनी है
दुनिया में जब तक इंसानों के बीच
शेष बची है जीने की इच्छा
वे करते रहेंगे विरोध
अपने बेमौत मारे जाने का ।

--- शरद कोकास

(कविता – शरद कोकास,चित्र गूगल से साभार )

7 टिप्‍पणियां:

  1. jiyo
    jiyo
    jiyo
    kokaasji,
    kamaal ki lekhni chalaate ho ji....
    gazab ka aalekh....
    badhaai !

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  2. गज़ब का प्रतिरोध।
    बेहतरीन अभिव्यक्ति।

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  3. हवस के घोड़ों पर सवार
    तानाशाहों के लिये यह चेतावनी है
    दुनिया में जब तक इंसानों के बीच
    शेष बची है जीने की इच्छा
    वे करते रहेंगे विरोध
    अपने बेमौत मारे जाने का ।

    क्या कहेने बहुत बढ़िया !!
    वैसे केवल युद्घ में नहीं आजकल तो लोग यु भी बेमौत मरा करते है ,
    ज़िन्दगी खुद उनपे किसी ना किसी रूप में "छोटा बच्चा" बन गिर ही जाती है |

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  4. हाँ बन्धु, युद्ध का विरोध तो होना ही चाहिए। इसके दंश आने वाली पीढ़ियों को भी युगों युगों तक सालते रहते हैं।

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  5. कहाँ था वह छोटा बच्चा -इतना शैतान बच्चा भी कभी इतिहास में हुआ है ? बहुत त्रासद !

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  6. युद्ध अनावश्यक है, युद्ध के विरुद्ध युद्ध का ऐलान जरूरी है।

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आइये पड़ोस को अपना विश्व बनायें